Wednesday, 29 April 2026

शिक्षा में Generative AI: University of Southern California की नवीनतम रिपोर्ट

शिक्षा सहित अन्य कई क्षेत्रों में जब भी 'जेनरेटिव एआई' (जैसे ChatGPT, Gemini, Deepseek आदि) का जिक्र होता है, तो अक्सर दिमाग में यह बात आती है कि यहाँ से तो कॉपी-पेस्ट होता है और इसका दुरुपयोग ही ज़्यादा हो रहा है। लेकिन University of Southern California (USC) की हालिया रिपोर्ट "Critical Thinking and Ethics in the Age of Generative AI in Education"  हमारे इस दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल कर एक नयी दिशा दे रही है। यह रिपोर्ट हमें 'डर' से निकालकर 'सोच-समझकर अपनाए जाने वाले अभ्यास' की ओर ले जाती है।
आइये AI Bodh पर आज इसी रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर बात करते हैं:-

1. Deny and Detect की बजाय Embrace and Enhance

रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हमें AI पर प्रतिबंध लगाने या उसे पकड़ने वाले 'AI Detectors' के भरोसे नहीं रहना चाहिए, क्योंकि ये डिटेक्टर्स अक्सर अविश्वसनीय होते हैं। इसके बजाय, शिक्षकों को "Embrace and Enhance" (अपनाएं और बेहतर बनाएं) की रणनीति अपनानी चाहिए। लक्ष्य छात्रों को AI-संचालित Workforce के लिए तैयार करना है।

2. अंतिम ड्राफ्ट से ज्यादा प्रक्रिया पर ध्यान (Process over Product)

अब तक शिक्षा में सारे अभ्यास के बाद अंतिम ड्राफ्ट (जैसे- फाइनल किया हुआ निबंध या पूर्ण किया हुआ असाइनमेंट) को महत्व दिया जाता रहा है। लेकिन AI के दौर में, USC रिपोर्ट एक Pedagogical Shift (शिक्षण पद्धति में बदलाव) का सुझाव देती है:

  • Iterative Writing: सारे अभ्यास के बाद जो लिखा है, केवल उसे न देखें, बल्कि यह देखें कि स्टूडेंट ने उसे सुधारने और अंतिम रूप देने में कितनी बार सोचा और कितने व कैसे बदलाव किए। मतलब, उसने कितनी क्रिएटिविटी की
  • ABE+ फ्रेमवर्क: रिपोर्ट एक ऐसे मॉडल का सुझाव देती है जहाँ विद्यार्थी AI-Coach के साथ मिलकर काम करते हैं, और उनके हर संपादन और विचार प्रक्रिया को ट्रैक किया जाता है। इससे 'कॉपी-पेस्ट' करना कठिन हो जाता है। यह फ्रेमवर्क इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि शिक्षा का ध्यान 'अंतिम आउटपुट' से हटकर 'सीखने-लिखने की प्रक्रिया' पर केंद्रित हो सके।
                  ABE+ फ्रेमवर्क की मुख्य विशेषताएं (Key Points):

    • प्रोसेस पर फोकस: इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को लिखने की बुनियादी कला सिखाना है। यह मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं करता कि कुल मिलाकर क्या लिखा गया, बल्कि यह देखता है कि छात्र ने कितनी बार सुधार (Revision) और विचार (Reflection) किया।
    • डिजिटल कोच की भूमिका: इसमें छात्रों को एक विशेष इंटरफ़ेस मिलता है जहाँ एक AI चैट पैनल 'कोच' की तरह काम करता है। यह किसी मानवीय मित्र की तरह सुझाव देता है, लिखने से पहले चर्चा करता है और ड्राफ्ट में सुधार के क्षेत्र बताता है।
    • क्रिटिकल थिंकिंग को बढ़ावा: यह सिस्टम छात्र के बदले खुद कंटेंट नहीं लिखता। इसके बजाय, यह AI का उपयोग छात्र द्वारा लिखे की आलोचना करने, तार्किक कमियों को खोजने और विचारों को चुनौती देने के लिए करता है। इससे छात्र की अपनी मौलिकता बनी रहती है।
    • चीटिंग पर लगाम: यह सिस्टम छात्र के हर छोटे बदलाव और उसके Intention को ट्रैक करता है। यह शिक्षकों के लिए एक summary तैयार करता है, जिससे नकल करना लगभग असंभव हो जाता है और टीचर यह समझ पाते हैं कि विद्यार्थी का कौशल किस दिशा में जा रहा है।

3.  AI की गलतियों को सुधारना

AI द्वारा कई बार "Hallucinations" (भ्रम), गलत तथ्यों और मनगढ़ंत स्रोतों (Fabricated Sources) का generation होता है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • सत्यापन: छात्रों को सिखाया जाना चाहिए कि वे AI द्वारा दी गई जानकारी का 'फैक्ट-चेक' कर सकें।
  • तर्क को पहचानना: इस पर भी विचारें कि क्या AI का दावा तार्किक है? क्या वह लेखक या स्रोत वास्तव में सही है और जो कार्य किया जा रहा है, उसमें विशेषज्ञ है?
         कुल मिलाकर, यह समझना ज़रूरी है कि हमारे विवेक के बिना AI का आउटपुट अधूरा और खतरनाक हो सकता है।

4. नैतिक द्वंद्व (Ethical Divide)

USC की रिसर्च में शिक्षकों के दो प्रमुख दृष्टिकोण सामने आए हैं:

  1. नियमों का पालन करने वाले: जो मानते हैं कि AI का उपयोग सख्त सिद्धांतों और प्राइवेसी के नियमों के तहत ही होना चाहिए।
  2. परिणाम चाहने वाले: जो मानते हैं कि यदि AI से दक्षता बढ़ती है या जिन क्षेत्रों में संसाधन सीमित हैं, में कार्य करने में मदद मिलती है, (अर्थात आवश्यकता है) तो इसका उपयोग कर लेना ही नैतिकता है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि शिक्षकों का आत्मविश्वास (Self-efficacy) और उनकी चिंता (Anxiety) ही यह तय करती है कि वे क्लास में AI को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाएंगे।

5. "A" ग्रेड का जाल और बेसिक्स ना समझ पाना

एक बड़ी चुनौती यह है कि छात्र अक्सर शिक्षा को केवल 'अच्छे ग्रेड' पाने के रूप में देखते हैं।

  • सीखने की आदत: जब ChatGPT आसानी से "A-ग्रेड" वाली पढ़ाई करवा देता है, तो छात्र उस 'संघर्ष' से दूर चले जाते हैं जो AI के बिना सीखने के लिए जरूरी है।
  • बुनियादी ज्ञान: शुरूआती कोर्सेज (जैसे- कैलकुलस या इंट्रोडक्टरी कोडिंग) में AI का अत्यधिक प्रयोग छात्रों की बेसिक समझ को कमजोर कर सकता है।

6. भविष्य की दिशा

यह हो कि, AI शिक्षकों की जगह नहीं ले, बल्कि उन्हें एक Facilitator बनाए। कुछ उदाहरण निम्न हैं:-

  • Personalized Learning: AI हर छात्र की जरूरत के हिसाब से लर्निंग प्लान बना सकता है।
  • Global Problem Solving: यह छात्रों को वैश्विक समस्याओं के लिए जटिल और अनुकूल समाधान खोजने में मदद करे।

गतिविधि श्रेणी

उदाहरण

विश्लेषण

AI से अपनी थीसिस में कमियां ढूंढना या विरोधी तर्क (Red Teaming) पैदा करना।

मूल्यांकन

AI द्वारा जनरेटेड कंटेंट में पक्षपात (Bias) या गलत जानकारी की जांच करना।

सृजन

किसी ऐतिहासिक व्यक्ति की शैली में पत्र लिखने का सिमुलेशन करना, लेकिन लेखन स्वयं का हो।


बॉटम लाइन 

कुल मिलाकर USC की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि तकनीक चाहे कितनी भी तेजी से क्यों न बढ़े, शिक्षा का मानवीय पहलू, भावनात्मक जुड़ाव, नैतिक मार्गदर्शन और मौलिक सोच, हमेशा केंद्र में रहना चाहिए। 

हमें छात्रों को केवल AI का 'उपभोक्ता' नहीं, बल्कि 'ज्ञान का निर्माता' बनाना है।

सन्दर्भ: https://today.usc.edu/wp-content/uploads/2024/02/USC_GenerativeAI_011624_FINAL.pdf

-०-

- डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी

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